Is this love ?

May 1, 2012

कहते है जिसको प्यार हम, उसको क्या हम खाक समझते हैं |

जिस किसी पर भी हम मरते हैं, उसे ही मार कर रखते हैं ||

 

परेशां हैं तो क्या हुआ , आंसूं पोंछने को हम पास तो बेठे हैं |

दूर रहे खुश किसी और के साथ,  यह न हम गवारा करते हैं ||

 

प्यार से लिए जा रहा है क़र्ज़, उसे खुश हम रखते हैं |

जो दिए उसने पैसे फेंकर, अब उससे रंजिश हम रखते हैं ||

 

हुए जब  परेशां इस दुनिए से,  खुदा के पास हम  चलते हैं |

न लगा वहां भी दिल, वापिस इस दुनिया का रुख हम करते हैं ||

 

गर सोच लिया एक  बार, तो हो कर रहेगा कुछ न कुछ |

न हुआ तो क्या हुआ, मन में ख्याल समझकर हम रखते हैं ||

 

क्या पता यह उससे सुना या  दीमाग की मेरे  ही खलिश  हैं |

इसका  हिसाब क्यूँ रखे , जब याद यह सब  हम रखते हैं ||

 

 


Contrarian thoughts …

November 1, 2010

ना हो मरना तो जीने का मजा क्या ?

गर सोच लिया है,तो कुछ भी हो सकता है !
पर ख्याल ही तो है,बदल भी सकता है !

दोस्त  गमखावारी में मेरी  सैइ  फरमावेगे क्या ,
जखम के  भरने तलक  नाखून न  बढ जावेंगे क्या |

तंग-ए -दिल का गिला  क्या,  यह  वो  काफ़िर  दिल  है ,
के अगर  तंग ना  होता  तो  परेंशान  होता |

जिन्दगी  अपनी  जब  इस  शकल  से  गुजरी  ग़ालिब ,
हम  भी  क्या  याद  करेंगे  की  खुदा  रखते  थे |

बातें हमारी थी तो किसी ने ना सुनी , किसने कही हर एक ने पूछा|
कुछ हुआ ग़ालिब बदनाम और कुछ हुआ  हमारा नाम |

मौत  का  एक  दिन  मुययिन  है ,
नींद  क्यूँ  रात  भर  नहीं  आती ?


Desires ….

April 1, 2010

हजारो ख्वहिशे ऐसी की हर ख्वहिश पे दम निकले ,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले |

या तो इस दिल की सारी ख्वहिशे पूरी कर दे ,
या फिर ऐक ऐसा दिल दे दे, जिसमे कोई ख्वहिश ही न हो |

बेह्तर तो है यही कि इस दुनीया मे दिल ना लगे,
पर क्या करे के जो काम ना बेदिल्लगी चले |

अब तो घबराकर कर ये कह्ते है की मर जायेगे,
मर गये पर न लगा जी, तो कीधर जायेगे |

हूऐ मर के हम जो रुसवा, हूऐ कयू ना गर्के  दरीया  ,
ना कभी जनाजा उठ्ता, न कही मजार होता |

क्यो न फीरदौस (heaven) मे दोजख (hell) को मिला ले या रब,
सैर के वासते थोडी सी फिजा और सही |


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